शुक्रवार, 11 मार्च 2011

फुल जंगली नहीं होते

हेमंत देओलेकर वेसे तो एक रंगमंच के कलाकार है लेकिन उनकी मोलिक प्रकृति कवी की है वे बेहद संवेदनशील कवी है। सर्वाधिक कविताए उन्होंने बच्चो (बाल मनोविज्ञान) पर लिखी हैप्रस्तुत हे उनकी एक नविनतम रचना-:
फुल जंगली नहीं होते ।
जंगलो मै खिलने भर से क्या
फुल जंगली हो जाते है ।
फूलो और पौधो के बारे मे हमारी जिज्ञासाए
सवालों मै नहीं बदलती ,
क्या देवताओ को अर्पित होना
और गुलदस्तो मे शरीक होना ही कसोटी है
फुल होने की ?
करेले के फुल पर बेठी तितली को देखो !
उसकी आँखों मै भी वाही चमक है
जो किसी को गुलाब देते वक्त
तुम्हारी आँखों मे होती है ।

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